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छोटी सी प्रार्थना
जितना जी चाहे घिस लेना अंत में तीखी धार बनाना
जितना अत्याचार दिखेगा मुझको ‘घातक वार’ बनाना…..
हफ्तेभर के थकने वाले दिन बीते तो,
‘राहत वाला’ अंतिम दिन ‘इतवार’
बनाना .
जिस पल कोई दुर्बल साथी ‘जीत’ रहा हो
खुशी -खुशी मुझे उसी खेल में ‘हार’ बनाना…
भीतर चाहे जितनी सघन उदासी रह ले
बाहर मुझको ‘रंगों का त्योहार’
बनाना…
समीर